-
861
छात्र -
809
छात्राएं -
51
कर्मचारीशैक्षिक: 47
गैर-शैक्षिक: 4
परिकल्पना
- के. वि. सं. उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपने छात्रों को ज्ञान/मूल्य प्रदान करने और उनकी प्रतिभा, उत्साह और रचनात्मकता का पोषण करने में विश्वास रखता है।
उद्देश्य
- शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवाचारों को शुरू करना और बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना और बच्चों में “भारतीयता” की भावना पैदा करना।

विद्यालय के बारे में
उत्पत्ति
पीएम श्री केवी एएफएस अर्जनगढ़ की स्थापना 1983 में 6वीं कक्षा तक प्रत्येक दो सेक्शन के साथ की गई थी। प्रत्येक आगामी सत्र में अगली कक्षा 10वीं तक प्रारंभ की गई। केवल 2008-2009 में विद्यालय को 11वीं कक्षा तक बढ़ा दिया गया और 2009-2010 में अगले वर्ष 12वीं तक बढ़ा दिया गया...
विद्यालय के दृष्टिकोण के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैनिक कर्मियों सहित केंद्र सरकार के स्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना; उत्कृष्टता का पीछा करने और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में गति निर्धारित करने के लिए . . .
विद्यालय के उद्देश्य के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित केंद्र सरकार के स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना; उत्कृष्टता का पीछा करने और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में गति निर्धारित करने के लिए . . .
संदेश
श्री विकास गुप्ता, भा. प्र. से., आयुक्त
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर मैं देश के समस्त शिक्षक समुदाय को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
आज जब शिक्षा का क्षेत्र तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब भी शिक्षण की मूल भावना और उसका सार शाश्वत है। देशभर के केन्द्रीय विद्यालयों में हमारे शिक्षक पूर्ण समर्पण, प्रतिबद्धता और अटूट उत्साह के साथ शिक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री वरुण मित्र
उपायुक्त केवीएस क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली
“शिक्षा सोच को आकार देती है, चरित्र का निर्माण करती है और राष्ट्र को मज़बूत बनाती है।” तेज़ी से हो रही तकनीकी प्रगति और अभूतपूर्व बदलावों के इस दौर में, शिक्षा केवल ज्ञान हासिल करने तक सीमित नहीं है; यह चरित्र, रचनात्मकता, क्षमता और संवेदना को विकसित करने का माध्यम है। केंद्रीय विद्यालय संगठन, क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली, उत्कृष्टता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ, एक प्रगतिशील, समावेशी और जागरूक भारत की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है। केंद्रीय विद्यालय हमेशा से ही सीखने, अनुशासन, विविधता और राष्ट्रीय एकता के जीवित उदाहरण रहे हैं, जहाँ पढ़ाई-लिखाई में बेहतरीन प्रदर्शन के साथ-साथ खेल, कला, संस्कृति, टेक्नोलॉजी और जीवन-कौशल पर भी ध्यान दिया जाता है। हमारी कोशिश ऐसे नागरिक तैयार करने की है जो आत्मविश्वासी, संवेदनशील, मुश्किलों का सामना करने वाले, ज़िम्मेदार और भविष्य के लिए तैयार हों। इस सोच को ध्यान में रखते हुए, हमारे विद्यालय, शिक्षा का ऐसा श्रोत हैं जहाँ बच्चे सवाल पूछतें है , प्रयोग करते है , नई चीज़ें खोजते है , मिलकर काम करते है और कुछ नया सिखते और बनाते हैं । नई टेक्नोलॉजी नन्ही सोंच को सीखने में मदद करती है और शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते है जो शिक्षार्थी को ज्ञान और उनके सपनों को कामयाबी में बदलने के लिए प्रेरित करते है। शिक्षक भविष्य के निर्माता और बदलाव लाने वाले होते हैं। नई शिक्षा निति 2020 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनका लगातार प्रोफेशनल डेवलपमेंट, पढ़ाने का नया और अनोखा तरीका और हर सीखने वाले के प्रति समर्पण बहुत ज़रूरी है। जैसे-जैसे हम ‘विकसित भारत’ के विज़न की ओर बढ़ रहे हैं, आइए हम हर केंद्रीय विद्यालय को क्रिएटिविटी, अच्छे चरित्र और क्षमता का केंद्र बनाने का संकल्प लें, जहाँ हर बच्चा अपनी काबिलियत को पहचाने और हर शिक्षक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करने में सक्षम हो। आइए, हम पूरे विश्वास, सहयोग और प्रतिबद्धता के साथ मिलकर एक ऐसा शैक्षिक माहौल बनाएं जहाँ हर सीखने वाला आगे बढ़ सके, हर प्रतिभा को निखरने का मौका मिले,हर सपने को सही दिशा मिले और वह सफलता के नए शिखरों को छुएँ। केन्द्रीय विद्यालय संगठन एक समृद्ध, प्रेरणादायी एवं समावेशी शिक्षण वातावरण प्रदान करता है, जहाँ विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने, अपनी प्रतिभा को निखारने तथा ज्ञान, कौशल और मूल्यों से सुसज्जित होकर अपने उज्ज्वल भविष्य को आकार देने के लिए निरंतर प्रेरित होते हैं। मैं, सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल, सफल एवं सार्थक भविष्य की हार्दिक मंगलकामना करता हूँ। वे लगातार सीखते रहें, आगे बढ़ें, बेहतरीन प्रदर्शन करें और देश के विकास में सार्थक योगदान दें। जय हिंद!
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अरविन्द कुमार शर्मा
प्राचार्य
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय एएफएस अर्जनगढ़ में आपका स्वागत है। इस प्रतिष्ठित केंद्रीय विद्यालय में सेवा करना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है, जो केंद्रीय विद्यालय संगठन के दृष्टिकोण और मिशन के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य युवा मन को जिम्मेदार, ज्ञानवान, अनुशासित और दयालु नागरिकों के रूप में विकसित करना है, जो 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार हों। हमारे विद्यालय में, हम एक सुरक्षित, समावेशी और प्रेरक शिक्षण वातावरण प्रदान करने का प्रयास करते हैं, जहाँ प्रत्येक बच्चे को अपनी पूर्ण क्षमता का एहसास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ, हम चरित्र निर्माण, अनुशासन, मूल्य आधारित शिक्षा, पर्यावरण जागरूकता, शारीरिक फिटनेस, नवाचार, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच के विकास पर समान रूप से जोर देते हैं, जैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में परिकल्पित है। शिक्षक, अभिभावक और छात्र शैक्षिक यात्रा में समान भागीदार हैं। आपसी विश्वास, सहयोग और निरंतर संवाद के माध्यम से, हम एक ऐसा वातावरण बना सकते हैं जो जिज्ञासा, आलोचनात्मक सोच और आजीवन सीखने को प्रेरित करता है। मैं सभी विद्यार्थियों से ईमानदारी, समय की पाबंदी, आदर और उत्तरदायित्व के मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह करता हूँ। आइए, हम सब मिलकर अपने विद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाएँ, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी सपने देखने, उन्हें साकार करने और समाज एवं राष्ट्र में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित हो। मैं विद्यालय की वेबसाइट पर आने वाले सभी आगंतुकों का हार्दिक स्वागत करता हूँ और आपको हमारे विद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक, सह-पाठ्यक्रम और अतिरिक्त गतिविधियों को देखने के लिए आमंत्रित करता हूँ, जो हमारे विद्यालय को जीवंत और गतिशील बनाती हैं। आइए, हम सब मिलकर समर्पण और उत्कृष्टता के साथ राष्ट्र का नेतृत्व करें, उसका मार्गदर्शन करें और उसकी सेवा करें। अरविंद कुमार शर्मा प्रधानाचार्य पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय एएफएस अर्जनगढ़
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बाल वाटिका
बाल वाटिका कार्यक्रम को कक्षा 1 से पहले के बच्चों के लिए एक प्रारंभिक कक्षा के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसमें मनोरंजक कक्षाओं . . .
निपुण लक्ष्य
निपुण - समझदारी और संख्यात्मकता के साथ पढ़ने में दक्षता के लिए राष्ट्रीय पहल . . .
शैक्षणिक हानि कार्यक्रम का मुआवजा (सीएएलपी)
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अध्ययन सामग्री
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कार्यशालाएँ एवं प्रशिक्षण
विद्यालय शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों के निरंतर व्यावसायिक विकास . . .
विद्यार्थी परिषद
हर साल नवनिर्वाचित छात्र परिषद के लिए अलंकरण समारोह जुलाई . . .
अपने स्कूल को जानें
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अटल टिंकरिंग लैब
“अटल टिंकरिंग लैब” ‘भारत में दस लाख बच्चों को नियोटेरिक इनोवेटर्स के रूप में विकसित करने’ की दृष्टि से, अटल इनोवेशन मिशन पूरे भारत के स्कूलों . . .
डिजिटल भाषा लैब
विद्यालय में डिजिटल लैंग्वेज लैब नहीं है . . .
आईसीटी - ई-क्लासरूम एवं प्रयोगशाला
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पुस्तकालय
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प्रयोगशालाएँ - भौतिकी/रसायन विज्ञान/जीवविज्ञान
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भवन एवं बाला पहल
बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड (बाला) स्कूल के संपूर्ण भौतिक वातावरण को सीखने की सहायता के रूप में विकसित करने के बारे में है . . .
खेल अवसंरचना (खेल के मैदान)
खेल विभाग विद्यालय के छात्रों को अवसर प्रदान करता है . . .
एसओपी/एनडीएमए
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खेल
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स्काउट एवं गाइड
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शिक्षा भ्रमण
टेरी - ऊर्जा और संसाधन संस्थान
ओलम्पियाड
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प्रदर्शनी - एनसीएससी/विज्ञान/आदि
Lorem Ipsum is simply dummy text of the printing and
एक भारत श्रेष्ठ भारत
“एक भारत, श्रेष्ठ भारत”, जिसका अर्थ है ‘एक भारत, सर्वश्रेष्ठ भारत’, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक एकीकरण और आपसी समझ . . .
हस्तकला या शिल्पकला
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मजेदार दिन
मजेदार दिन का उद्देश्य कम उम्र में बच्चों का पोषण करना और विभिन्न क्षेत्रों में छिपी प्रतिभा को सामने लाना है।
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पी.एम. श्री स्कूल
“पीएम श्री स्कूल” भारत सरकार द्वारा एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इस पहल का उद्देश्य उभरते भारत के लिए 14500 से अधिक पीएम श्री स्कूल . . .
कौशल शिक्षा
पीएमकेवीवाई के पहले चरणों को लागू करने में आने वाली चुनौतियों और एकत्रित सीखों के आधार पर, “कौशल भारत कार्यक्रम” की छत्र योजना के तहत . . .
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सामाजिक सहभागिता एक मानव व्यवहार है, जो आपसी विश्वास पर आधारित होता है, तथा लोगों के दृष्टिकोणों व मान्यताओं से निर्मित होता है। इस...
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विद्यांजलि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश भर के स्कूलों में सामुदायिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से स्कूलों को मजबूत करने के . . .
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विद्यालय में ग्रामांचल (मॉडल गांव) के विकास का उद्देश्य एक आत्मनिर्भर, पर्यावरण के अनुकूल ग्रामीण वातावरण बनाना है जो छात्रों के लिए अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देता है। यह पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक नवाचारों के साथ एकीकृत करता है, सामुदायिक जुड़ाव और समग्र शिक्षा को बढ़ाने के लिए कृषि, हस्तशिल्प और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
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